भारत की ऊर्जा सुरक्षा में ओएनजीसी विदेश (ओवीएल) का योगदान।

 संरक्षण के सिद्धांत के अनुसार ऊर्जा को ना कभी नष्ट किया जा सकता हैं और ना ही सृजित। ऊर्जा को सिर्फ एक रूप से दूसरे रूप में बदला जा सकता है। इस ब्रम्हाण्ड की कुल ऊर्जा नियत है।

        जिस प्रकास एक मानव शरीर के सुचारू सञ्चालन के लिए ऊर्जा की जरुरत अहम होती है, ठीक उसी प्रकार किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा को पूरा किये बिना उच्च विकास दर से गति देना संभव नहीं है। दुनियाभर में विभिन्न ऊर्जा स्रोतों के बढ़ते दोहन के लिए प्रमुख कारण भी यही है ताकि वहाँ की सरकारें अपने नागरिकों की जिंदगी, व्यवसाय, विनिर्माण क्षेत्र, आईटी सेक्टर, गुड गवर्नेंस एवं शिक्षा के क्षेत्र को गति दे सकें। समय के साथ ऊर्जा की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए देश में कई निजी एवं सार्वजानिक क्षेत्र की बड़ी-बड़ी कम्पनियाँ नए ऊर्जा क्षेत्रों की खोज, अनुसंधान एवं उनके विकास में बड़ी भारी मात्रा में निवेश कर रहे हैं। साथ ही इन ऊर्जा स्रोतों से संसाधनों के दोहन, परिष्करण एवं वितरण पर भी काम कर रही हैं। विभिन्न प्रकार के ऊर्जा स्रोतों के प्रकार के आधार पर देश में प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड (ओएनजीसी), आईओसीएल, बीपीसीएल, एनएचपीसी, एनटीपीसी एवं कई अन्य कम्पनियाँ ऊर्जा उत्पादन में सहयोग कर रही हैं।

        हमारे देश में मुख्य रूप से विद्युत ऊर्जा के प्रमुख स्रोत कोयला, जल शक्ति, नाभकीय शक्ति संयंत्र आदि हैं, जिनमें से जल शक्ति को छोड़कर बाकि अनवीकरणीय प्रकार के ऊर्जा स्रोत हैं। हाल ही में न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में सौर ऊर्जा द्वारा विद्युत उत्पादन एक नए ऊर्जा विकल्प के रूप में उभरकर सामने आया है जो कि प्रकृति में अक्षय ऊर्जा का सबसे बड़ा नवीकरणीय स्रोत है। यह पूरी तरह से इको-फ्रेंडली एवं  प्रदुषणरहित है जबकि बाकि स्रोत यथा-तथा पर्यावरण, प्राणियों एवं समस्त पारिस्थितिक तंत्र के लिए घातक हैं।

        जहाँ तक ऊर्जा उत्पादन की बात है तो ओएनजीसी देश एवं दुनिया के दूसरे हिस्सों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने वाली भारत की सबसे बड़ी अंतर्राष्ट्रीय पेट्रोलियम (तेल एवं गैस) कॉर्पोरेट कंपनी है जो इस बर्ष अपनी स्थापना की 60वीं बर्षगांठ मना रही है।

        “ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल)” ओएनजीसी की ही विदेश शाखा है जिसका मूल उद्देश्य भारत के बाहर तेल और गैस की खोज, विकास, उत्पादन एवं संवर्धन के लिए सम्भावना तलाशना है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा में ओवीएल के योगदान को इसी बात से समझा जा सकता है कि यह वर्तमान में दुनिया के 17 देशों में 37 विभिन्न प्रोजेक्ट्स पर काम करते हुए इनकी अधिकांश परिसंपत्तियों पर अपना अधिकार रखती है। इन 17 देशों में रूस और ब्राजील जैसे दुनिया के बड़े-बड़े देश भी हैं। ओवीएल ने हाल ही में रूस के सबसे बड़े तेल क्षेत्र साइबेरिया में तेल उत्पादन की अतिरिक्त 11% हिस्सेदारी खरीदने के लिए $390 मिलियन के एक समझौते पर हस्ताक्षर करते हुए इस क्षेत्र में अपनी हिस्सेदारी 26% तक पँहुचा दी है।

        यह देश के तेल उत्पादन में 14.8% तथा प्राकृतिक गैस के उत्पादन में 12.5% योगदान देती है। भंडार और उत्पादन के मामले में ओवीएल, अपनी पैतृक कंपनी ओएनजीसी इंडिया के बाद भारत की दूसरी सबसे बड़ी पेट्रोलियम कंपनी है। यह पहली भारतीय तेल कंपनी है जिसने भारत के बाहर इक्विटी तेल और गैस का उत्पादन किया है। इसने अपने तेल उत्पादन की शुरुआत 2002-03 में वियतनाम से शुरू की थी।

        अतः समझ जा सकता है कि ओवीएल की कई अन्य देशों में भी बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण यह ओएनजीसी की ही तरह भारत की ऊर्जा सुरक्षा में अतुलनीय भूमिका अदा करती है।

नोट: हिंदी दिवस 2016 (14 सितम्बर) के अवसर पर ओएनजीसी विदेश (ओवीएल) द्वारा आयोजित हिंदी निबंध प्रतियोगिता में 300 शब्द-सीमा को ध्यान में रखते हुए उपरोक्त विषय पर मेरे द्वारा लिखा गया संक्षिप्त निबंध।

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