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व्यंग्य: क्योंकि हम इन्सान हैं।

प्रभु सब तेरी माया है। तुने ही संसार बनाया है। तेरी मर्जी के बिना पत्ता तक नहीं हिल सकता, सत्य है। लेकिन परमेश्वर तू धरती पर आकर तो देख, तू खुद हिल जायेगा। प्रभु सतयुग में आकर लीला कर गये। पता है हमें आपने राम बनकर मर्यादा का पाठ पढाया था। सुधर के रख दिया आपने राक्षसों को और जो न सुधरे उनको पहुंचा दिया ऊपर। तुमने कृष्ण बनकर प्रेम की गंगा बहा दी, खूब बंसी बजायी, पर अपनी समझ में ये नहीं आता दीनबंधु की आपने तो बंसी बजाना सिखाया था, ये कलयुगी मानव बंद बजाना कहाँ से सीख गया। ठीक है अयोध्यापति, आपने राम बनकर अयोध्या पर शासन किया था। हे द्वारिकाधीश, संसद की अध्यक्षता करके बताइए, आपको पता चल जायेगा। जब सत्तापक्ष अपने महान कार्यों के बारें में बताएगा। हम तो कहते हैं, इन बातों को मारिये गोली। अगर आप से मिलने सुदामा आएगा तो आप उनसे मिलेंगे या नहीं, इस बात पर करोड़ों रूपये का सत्ता लग जायेगा।