आत्मचिंतन (स्व-मूल्यांकन ) !
हारा हुआ वह नहीं, जो अपने प्रयास में सफल नहीं हुआ, हारा हुआ व्यक्ति वह है, जिसने प्रयास किया ही नहीं अथवा जिसने अपना आत्मविश्वास खो दिया है ! मुर्दा वह नहीं जो मर गया है, मुर्दा वह है जिसका आत्मविश्वास मर गया है !
शक्ति के विश्वास में ही शक्ति है ! आत्मविश्वास के अंकुर से ही प्रयत्न का पौधा फूटता है, और प्रयत्न के पौधे पर ही सफलता के फल लगते हैं ! और इस फल को प्राप्त करने के लिए हमें अपनी समस्त वृतियों को एक स्थान पर केन्द्रित कर, बिना फल पाने की अभिलाषा के साथ, आत्मविश्वास व कठोर पुरुषार्थ के बल पर अपना जीवन लक्ष निर्धारित करना होता है !
अपने प्रयत्न को इस आधार पर स्थापित करो कि हमें हर संभव सफल होना है ! आखिर सफलता को हमारे आत्मविश्वास एवं पुरुषार्थ के सामने नतमस्तक होना पड़ेगा ! सफलता बरबस ही हमारे कदम चूमेगी और हमें सफलता हरगिज मिलकर रहेगी !
अगर तुम्हें यह विश्वास नहीं की तुम मंजिल पर पँहुच पाओगे या नहीं, तो चलोगे कैसे ?
अरे, जब तुम चलने का भी जोखिम नहीं उठा सकते तो तुम अपने जीवन में उस सफलता रूपी पुष्प को कैसे हासिल कर सकोगे !
आत्मविश्वास की आवर्त सारणी में शंका, शंदेह, असफलता, घबराहट और निराशा जैसे तुच्छ तत्वों की कोई गुंजाईश ही नहीं होती ! जीवन रूपी पथ पर इस निश्चय के साथ आगे बढ़ना चाहिए कि इस अप्रत्याशित यात्रा में फूलों के बजाय काँटों का अनुपात अधिक होगा ! शंका, शंदेह, घबराहट और निराशा तुम्हें चारों तरफ से तुम्हें घेर लेंगी और असफलता से तुम्हारी टक्कर हो जाएगी ! स्थान स्थान पर आपका मार्ग अबरुद्ध हो जायेगा और तुम निराशा, दबाब और घुटन के अथाह सागर में डूबकर हिलोरें खाने लगोगे ! जहाँ से तुम्हें किनारे लगाने वाला कोई नहीं होगा क्योंकि वहाँ केवल तुम हो, और सिर्फ तुम हो, वो भी अकेले, और अगर कोई हुआ भी तो वो भी कोई तुम्हारे जैसा ही धूर्त और वो भी नि:सहाय होगा, जिसमें खुद को बचाने की भी सामर्थ्य नहीं होगी ! और वास्तव में देखा जाये तो ये क्षण ही तो तुम्हारे धैर्य की असली अग्नि परीक्षा है !
मन में हमेशा दृढ आत्मविश्वास के साथ यही विश्वास और संकल्प लेकर जीवन रूपी यात्रा पर अपने कदम आगे बढ़ाना कि अंत में तुम्हें न केवल सफलता मिलेगी, अपितु सम्पूर्ण संसार तुम्हारे कदम चूमेगा ! जीवन पथ पर विजय की अभिलाषा से पूर्ण होकर, जीवन के अरमानों से लबरेज (परिपूर्ण) होकर, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने पर, प्रयत्न के पौधे पर लटका हुआ एवं आपके लिए प्रतीक्षारत स्वादिस्ट फल आपकी झोली में आ गिरेगा और आपके चरणों में नतमस्तक हो जायेगा !
अतः अपने जीवन की कठिन से कठिन घड़ियों में भी अपने आत्मविश्वास व धैर्य पर डटे रहने वाले महापुरुष की यही सबसे बड़ी कसोटी है !
इसलिए कहता हूँ कि जागो ! देश के नवयुवकों, देश के कर्णधारों, रास्ट्र के भविष्य जागो ! आज इस बूढ़े भारत को उन्हीं पुरातन नवयुवकों की आवश्यकता आन पड़ी है, जिन्होंने अपने अपने रास्ट्र, अपनी मातृभूमि के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था, इस देश को एक जीवंत रास्ट्र का कलेवर प्रदान किया था ! अरे देश के नवयुवकों, अपने इस भूढ़े भारत को फिर से नया कलेवर पहनाने के लिए अपने आत्मविश्वास व कठोर पुरुषार्थ के बल पर रास्ट्रविरोधी गतिविधियों को समूल नस्ट करते हुए उन्हें उखाड़ फेंकों ! आज यही हमारा सच्चा जीवन लक्ष है !
[31.07.2007]
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